वीकेंड पर घूमने का मन हो तो हर बार जयपुर या उदयपुर तक जाने की जरूरत नहीं। कोटा के आसपास रहने वालों के लिए रावतभाटा, बाड़ोली और भैंसरोड़गढ़ का चक्कर भी बढ़िया विकल्प है। इस रास्ते में पुराने मंदिरों की कारीगरी, चंबल के आसपास का नजारा और छोटे कस्बों का माहौल मिलता है। सबसे अच्छी बात, अपने वाहन से निकलें और साधारण ठहराव चुनें तो खर्च संभालकर रखा जा सकता है। यहां दो दिन की यात्रा का ऐसा हिसाब समझेंगे, जिसमें घूमने के साथ जेब का ध्यान भी रहे।
कोटा से रावतभाटा: कहां से शुरू करें सफर?
इस रावतभाटा वीकेंड ट्रिप का शुरुआती पड़ाव कोटा मानकर चल रहे हैं। कोटा से रावतभाटा की सड़क दूरी शुरुआती जगह के अनुसार बदलती है; ऑनलाइन कैब जानकारी में लगभग 54 किलोमीटर और डेढ़ घंटे का समय बताया गया है। शनिवार सुबह जल्दी निकलना ठीक रहेगा, ताकि रास्ते में नाश्ता करके भी दोपहर से पहले पहुंच जाएं। बाइक पर दो लोग या अपनी कार में चार लोग हों तो खर्च बांटना आसान रहता है। निकलने से पहले चुना हुआ रास्ता मैप पर देख लें।
बिना वाहन वालों को आने-जाने के साथ स्थानीय घूमने का इंतजाम भी सोचना होगा। केवल रावतभाटा पहुंचने का किराया देखकर बजट बनाना अधूरा हिसाब है। बाड़ोली और भैंसरोड़गढ़ के लिए स्थानीय गाड़ी चाहिए तो पहले पूरे चक्कर का भाव पूछें। इंतजार, वापसी और अतिरिक्त दूरी की बात भी साफ करें। यहां कोई तय बस किराया या टैक्सी दर नहीं जोड़ रहे, क्योंकि यात्रा की तारीख और मौके पर मिलने वाली सुविधा के बिना पक्का आंकड़ा देना सही नहीं होगा।
पहला दिन: बाड़ोली मंदिरों को आराम से देखें

पहले दिन बाड़ोली मंदिर परिसर रखें, जिसे बरौली या Baroli नाम से भी खोजा जाता है। राजस्थान पर्यटन की जानकारी में यहां के घाटेश्वर महादेव मंदिर को प्रमुख बताया गया है। इस जगह की खूबसूरती पत्थरों पर बनी बारीक आकृतियों और मंदिरों की बनावट में है। केवल सामने खड़े होकर फोटो लेने से ज्यादा मजा तब आएगा, जब थोड़ा ठहरकर खंभों और दरवाजों की कारीगरी देखेंगे। घूमने के लिए अपने कार्यक्रम में लगभग एक से डेढ़ घंटा रखें; यह सुझाया हुआ समय है।
इसके बाद रावतभाटा में दोपहर का खाना खाकर ठहरने की जगह देखें। कमरे की बुकिंग पहले कर लेना बेहतर रहेगा, खासकर परिवार साथ हो तो। शाम का कार्यक्रम हल्का रखें और स्थानीय तौर पर खुले, सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों पर ही घूमने निकलें। एक ही दिन में हर जगह पहुंचने की जल्दी यात्रा का मजा कम कर देती है। आसपास पानी देखकर कहीं भी नीचे उतरने या सुनसान रास्ता पकड़ने के बजाय स्थानीय लोगों से पहुंचने का सही रास्ता पूछ लेना समझदारी है।
दूसरा दिन: भैंसरोड़गढ़ का किला और नदी का नजारा

रविवार सुबह भैंसरोड़गढ़ की तरफ निकलें। राजस्थान पर्यटन के अनुसार किला चंबल और ब्राह्मणी नदियों से घिरी ऊंची चट्टानी जगह पर स्थित है। यहां का आकर्षण किले की स्थिति और आसपास का नदी वाला दृश्य है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि किले का हिस्सा अब हेरिटेज होटल के रूप में संचालित होता है। इसलिए अंदर घूमने, भोजन करने या ठहरने की अनुमति और कीमत पहले पूछें। इसे सामान्य सार्वजनिक किला मानकर मुफ्त प्रवेश मिलने की उम्मीद में न पहुंचें।
भैंसरोड़गढ़ में सार्वजनिक रूप से पहुंच योग्य जगहों पर घूमकर दोपहर तक खाना खा लें, फिर कोटा की वापसी रखें। यह कार्यक्रम जानबूझकर ढीला रखा गया है, ताकि रास्ते में चाय पीने या किसी जगह थोड़ी देर बैठने का समय मिले। होटल में विशेष भोजन, नाव की सैर या दूसरी गतिविधि करानी हो तो उपलब्धता और कीमत अलग से तय करें। नीचे दिए बजट में ये सुविधाएं शामिल नहीं हैं, इसलिए उनका खर्च जोड़ने पर कुल रकम बढ़ेगी।
दो दिन का खर्च: दो लोगों की बाइक यात्रा का हिसाब
अब सीधा हिसाब लगाते हैं। यह वास्तविक भुगतान की रसीद नहीं, दो लोगों के लिए स्पष्ट मान्यताओं वाला अनुमान है। कोटा से वापसी और स्थानीय घूमना मिलाकर 150 किलोमीटर मानें। बाइक का माइलेज 45 किलोमीटर प्रति लीटर और गणना के लिए पेट्रोल ₹105 प्रति लीटर रखें तो ईंधन करीब ₹350 बैठेगा। ₹105 यहां मौजूदा पंप दर का दावा नहीं है; अपनी बाइक के माइलेज, वास्तविक दूरी और उस दिन के पेट्रोल भाव से रकम बदल लें।
एक रात के साझा कमरे के लिए ₹1,200, दोनों के दो दिन के साधारण खाने के लिए ₹1,200 और चाय, पानी, नाश्ते के लिए ₹300 रखें। पार्किंग तथा छोटे अतिरिक्त खर्च का ₹300 बफर जोड़ें तो कुल ₹3,350, यानी प्रति व्यक्ति लगभग ₹1,675 बनता है। कमरे का आंकड़ा योजना बनाने के लिए है। ऑनलाइन रावतभाटा बजट होटल सूची में ₹1,147 से शुरुआती कीमत दिखती है, लेकिन तारीख, कर और उपलब्धता से अंतिम भुगतान बदल सकता है। बुकिंग से पहले कुल कीमत पूछें।
खर्च बचाने का आसान तरीका
रावतभाटा–बाड़ोली–भैंसरोड़गढ़ यात्रा में बचत का तरीका सीधा है: साझा वाहन, साधारण कमरा और पहले से तय खर्च। मौसम देखकर निकलें, पानी साथ रखें और वापसी दिन रहते शुरू करें। यही ढीला कार्यक्रम परिवार के साथ भी अपनाया जा सकता है।


