राजस्थान का चूरू सिर्फ गर्मी और रेतीले इलाकों के लिए ही नहीं जाना जाता। यहां पुरानी हवेलियां, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक इमारतें और प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए कई बढ़िया जगहें भी हैं। अगर आप पहली बार चूरू आ रहे हैं, तो शहर और आसपास की कुछ जगहें ऐसी हैं जिन्हें अपनी यात्रा में शामिल करना बनता है।
स्थानीय लोगों का भी ऐसा मानना है कि चूरू को ठीक से समझना है तो सिर्फ मुख्य बाजार घूमकर वापस नहीं जाना चाहिए। यहां की असली खूबसूरती पुरानी हवेलियों, तालाबों, मंदिरों और आसपास के इलाकों में देखने को मिलती है।
1. तालछापर अभयारण्य

अगर हवेलियां और मंदिर देखने के बाद कुछ समय प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं, तो तालछापर अभयारण्य बढ़िया विकल्प है। चूरू जिले में स्थित यह अभयारण्य अपने खुले घास के मैदानों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
यहां आपको काले हिरण सहित कई तरह के वन्यजीव और पक्षी देखने को मिल सकते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां आने वाले पक्षियों की वजह से यह जगह पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी काफी लोकप्रिय रहती है।
स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि तालछापर घूमने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा रहता है। उस समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है और वन्यजीवों को देखने के मौके भी बेहतर मिल सकते हैं।
अगर आप बच्चों या परिवार के साथ चूरू घूमने आए हैं, तो यह जगह बाकी ऐतिहासिक जगहों से थोड़ा अलग अनुभव देती है।
2. सेठानी का जोहड़ा

चूरू में घूमने की बात हो और सेठानी के जोहड़े का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है। यह यहां की काफी चर्चित जगहों में से एक है। पुराने समय में पानी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ऐसे जोहड़ों का बहुत महत्व हुआ करता था।
आज भी यहां आने पर पुराने राजस्थान की जल संरक्षण व्यवस्था की झलक देखने को मिलती है। आसपास का माहौल भी काफी शांत रहता है। स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि सुबह या शाम के समय यहां घूमने का मजा ज्यादा आता है, क्योंकि उस समय धूप कम होती है और माहौल भी अच्छा रहता है।
अगर आपको पुरानी जगहें देखने और स्थानीय इतिहास जानने में रुचि है, तो इस जगह को अपनी लिस्ट में जरूर रखें।
3. सालासर बालाजी मंदिर

चूरू जिले की तरफ आएं और सालासर बालाजी न जाएं, तो बहुत से लोगों को यात्रा अधूरी सी लगती है। सालासर बालाजी राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक है और यहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
सालासर कस्बे में स्थित यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मंगलवार, शनिवार और विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है कि बालाजी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि राजस्थान ही नहीं, बल्कि हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।
अगर आप परिवार के साथ चूरू की यात्रा कर रहे हैं, तो सालासर धाम को अपनी यात्रा में जरूर शामिल कर सकते हैं।
4. कोठारी हवेली

चूरू की पहचान यहां की खूबसूरत हवेलियों से भी है। इन्हीं में कोठारी हवेली का नाम भी लिया जाता है। पुरानी राजस्थानी वास्तुकला, नक्काशी और हवेलियों की बनावट पसंद करने वाले लोगों के लिए यह जगह खास हो सकती है।
इस हवेली को देखते हुए उस समय के संपन्न व्यापारिक परिवारों की जीवनशैली की झलक मिलती है। हवेली के छोटे-छोटे डिजाइन, दरवाजों और दीवारों पर किया गया काम इसे सामान्य इमारतों से अलग बनाता है।
स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि चूरू की पुरानी हवेलियों को जल्दबाजी में देखने के बजाय थोड़ा समय देकर देखना चाहिए। कई बार छोटी सी खिड़की, दरवाजे या दीवार पर बना डिजाइन भी अपने पीछे पूरी कहानी छिपाए होता है।
5. सुराणा हवेली
सुराणा हवेली चूरू की सबसे चर्चित ऐतिहासिक हवेलियों में गिनी जाती है। इसकी सबसे खास बात इसकी बड़ी संख्या में बनी खिड़कियां और दरवाजे हैं। हवेली की विशाल बनावट पहली नजर में ही ध्यान खींचती है।

बताया जाता है कि यह हवेली लगभग 19वीं सदी के दौरान बनाई गई थी और इसमें करीब 1,100 खिड़कियां और दरवाजे हैं। इसकी कई मंजिलों वाली बनावट उस दौर की समृद्ध वास्तुकला को दिखाती है।
स्थानीय लोगों का ऐसा कहना है कि पुराने चूरू की असली पहचान देखनी हो तो यहां की हवेलियों को जरूर देखना चाहिए। सुराणा हवेली उसी विरासत का एक शानदार उदाहरण है।
फोटोग्राफी पसंद करने वाले लोगों के लिए भी यहां आसपास कई अच्छे फ्रेम मिल सकते हैं, खासकर पुराने दरवाजों और जालीदार खिड़कियों के पास।
चूरू घूमने का सही तरीका
अगर आपके पास पूरा एक दिन है, तो सुबह जल्दी अपनी यात्रा शुरू करना बेहतर रहेगा। सबसे पहले शहर की पुरानी हवेलियां और ऐतिहासिक हिस्से देख सकते हैं। दोपहर की तेज धूप से बचने के लिए बीच में आराम करें और शाम के समय सेठानी का जोहड़ा जैसी खुली जगह पर जा सकते हैं।
सालासर बालाजी और तालछापर अभयारण्य के लिए अलग समय रखना ज्यादा अच्छा रहेगा, क्योंकि दोनों जगहों तक आने-जाने में समय लग सकता है।
यहां के स्थानीय लोगों का ऐसा भी मानना है कि चूरू को सिर्फ पर्यटन स्थल समझकर न देखें। पुरानी गलियों में थोड़ा पैदल चलें, स्थानीय लोगों से बात करें और यहां के खाने का स्वाद लें। तभी आपको इस इलाके का असली रंग देखने को मिलेगा।
चूरू पहली नजर में एक शांत शहर लग सकता है, लेकिन जब आप इसकी हवेलियों, धार्मिक स्थलों और आसपास की प्राकृतिक जगहों को करीब से देखते हैं, तो पता चलता है कि यहां देखने और जानने के लिए काफी कुछ है।



