राजस्थान में घूमने की बात चले तो अक्सर जयपुर और उदयपुर का नाम पहले आता है। लेकिन अपने वागड़ का डूंगरपुर भी छोटी छुट्टी बिताने के लिए अच्छा विकल्प है। यहाँ पुराने महल देखने को मिलते हैं, झील किनारे आराम से बैठ सकते हैं और शहर की गलियों में स्थानीय जिंदगी की झलक भी मिलती है। अगर आपका मन दो दिन कहीं निकलने का है, तो यह डूंगरपुर बजट ट्रिप आराम से घूमने का एक सीधा प्लान देती है।
डूंगरपुर में पहले दिन कहाँ से शुरुआत करें?
पहले दिन शहर पहुँचकर सबसे पहले ठहरने का इंतजाम कर लें। सामान कमरे पर रख देंगे तो घूमने में आसानी रहेगी। धर्मशाला जैसे एक ठहरने के विकल्प का किराया ₹300 बताया गया है। इसे उस यात्रा का खर्च समझें, आज का पक्का रेट नहीं। कमरा लेने से पहले किराया, साफ-सफाई, बाथरूम और खाने की सुविधा पूछ लें। बजट कम हो तो सजावट से ज्यादा जरूरी है कि जगह साफ हो और आने-जाने में आसानी रहे।
अगर डूंगरपुर पहुँचते-पहुँचते दोपहर निकल जाए, तो उसी दिन बहुत सारी जगहें देखने की जल्दी मत करें। खाना खाकर थोड़ा आराम करें और शाम को गैब सागर झील की तरफ निकल जाएँ। इस यात्रा में पहला दिन झील और बादल महल के लिए रखना ठीक रहेगा। इससे सफर की थकान के बाद भी घूमना भारी नहीं लगेगा। रास्ते में स्थानीय दुकानों पर चाय पीते हुए आसपास की जानकारी भी पूछ सकते हैं।
गैब सागर झील: शाम आराम से बिताने की जगह

गैब सागर झील डूंगरपुर की प्रमुख देखने लायक जगहों में शामिल है। इसके किनारे श्रीनाथजी का मंदिर परिसर है और यहाँ विजय राजराजेश्वर शिव मंदिर भी है। इसलिए झील की तरफ आने पर घूमने के साथ दर्शन का समय भी रखा जा सकता है। मंदिरों की बनावट में स्थानीय कारीगरों का काम देखने को मिलता है। राजस्थान पर्यटन की आधिकारिक जानकारी में भी इस झील और मंदिर परिसर का खास उल्लेख है।
यहाँ आने का प्लान ऐसा रखें कि कुछ देर बैठने का समय भी मिले। हर जगह पहुँचे, फोटो ली और आगे निकल गए, तो छोटी यात्रा भी भागदौड़ बन जाती है। झील के पास शाम बिताइए, आसपास का नजारा देखिए और परिवार साथ हो तो आराम से बातचीत कीजिए। फोटो लेने का मन हो तो दिन की बची हुई रोशनी में कोशिश करें। पानी के पास बच्चों पर नजर रखें और खाने के खाली पैकेट अपने साथ वापस ले जाएँ।
बादल महल: आकार से ज्यादा बनावट पर ध्यान दें

गैब सागर के किनारे स्थित बादल महल को इसी शाम के प्लान में जोड़ सकते हैं। इसे देखकर बड़े किले जैसी इमारत की उम्मीद करना जरूरी नहीं। इसकी खूबसूरती समझने के लिए पत्थर, मेहराब और पूरी बनावट को थोड़ा ध्यान से देखना बेहतर रहेगा। राजस्थान पर्यटन के अनुसार बादल महल के निर्माण में स्थानीय पारेवा पत्थर इस्तेमाल हुआ है। झील और महल को एक साथ देखने से इस हिस्से का पूरा दृश्य समझ आता है।
इसी तरह घूमते हुए केवल इमारत पर ध्यान न रखें, उसके आसपास भी नजर डालें। किसी हिस्से में प्रवेश बंद हो तो बाहर से ही देख लें। ऊपर जाने, अंदर घूमने या फोटोग्राफी की अनुमति मौके पर पूछें। रात का खाना समय से खाकर लौट जाएँ, ताकि अगले दिन जूना महल देखने के लिए सुबह आराम से निकल सकें।
दूसरे दिन जूना महल देखने का प्लान

डूंगरपुर की दो दिन की यात्रा में दूसरे दिन का मुख्य पड़ाव जूना महल रखें। राजस्थान पर्यटन इसे तेरहवीं शताब्दी की सात मंजिला इमारत बताता है। बाहर से इसकी बनावट किले जैसी लगती है, जबकि अंदर भित्तिचित्र, छोटी चित्रकारी और काँच व शीशे का काम इसकी पहचान हैं। पुराने भवनों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह देखने लायक जगह है। यहाँ केवल बाहर की फोटो लेकर लौटने के बजाय अंदर की कलाकारी समझने के लिए समय रखें।
जूना महल जाने से पहले वर्तमान प्रवेश व्यवस्था, टिकट और खुलने का समय पता कर लें। किसी पुराने वीडियो का समय देखकर सीधे पहुँचने से परेशानी हो सकती है। अंदर प्रवेश मिले तो सीढ़ियों और रास्तों पर संभलकर चलें। चित्रकारी को हाथ लगाने से बचें और जहाँ फोटो की अनुमति हो, वहीं कैमरा इस्तेमाल करें। सुबह यह पड़ाव पूरा करने के बाद खाना खाएँ और वापसी के सफर के हिसाब से बाकी समय रखें।
डूंगरपुर बजट ट्रिप का खर्च कैसे संभालें?
खर्च कम रखने के लिए पहले अपना कुल बजट तय करें। आने-जाने का किराया, कमरा, खाना और स्थानीय वाहन का खर्च अलग-अलग सोचेंगे तो हिसाब साफ रहेगा। ₹300 का कमरा मिल भी सकता है और नहीं भी, इसलिए थोड़ी अतिरिक्त रकम रखें। स्थानीय वाहन लेने से पहले आने-जाने का किराया तय कर लें। दो दिन में गैब सागर, बादल महल और जूना महल आराम से देखने का लक्ष्य रखें। इससे घूमना भी हो जाएगा और छुट्टी थकान में भी नहीं बीतेगी।

